Saturday, October 26, 2019

नेताओं से बचे रहेंगे।



सरकार की हमें नहीं जरूरत, १८
इसके बिना हम अच्छे रहेंगे, १८ नेताओं से बचे रहेंगे। १४

जो तन मन से मेहनत करेगा, १८  
खाएगा पियेगा मौज करेगा। १९
जो मेहनत करने से बचेगा, १८
भूखा नंगा परेशान रहेगा। १९
अमर सिद्धांत यही खूबसूरत १८         
सरकार की हमें नहीं जरूरत,
इसके बिना हम अच्छे रहेंगे, नेताओं से बचे रहेंगे।

नेता अपनों को शिक्षा देते १७
शिक्षित होते वो अफसर बनते १८
अनपढ़ रहते, नेता बन जाते १७
नेता बनकर वे शासन करते १८    
इससे समझो शासन की कूबत १८
सरकार की हमें नहीं जरूरत,
इसके बिना हम अच्छे रहेंगे, नेताओं से बचे रहेंगे।

नेता खुद अय्याशी करते हैं, १८
हमसे परिश्रम करने को कहते, १८  
हमारा धन जेबों में भरकर, १७
हमको कंगाल बनाकर रखते। १८
इसी से हर समय जनता डूबत १८
सरकार की हमें नहीं जरूरत,
इसके बिना हम अच्छे रहेंगे, नेताओं से बचे रहेंगे।

हम सर्दी गर्मी दोनों सहते १८
अनुकूल ताप में नेता रहते हैं।   
जब पसीना हमारा बहता है   १८
नेता ख़ुशी अनुभव करते हैं १९
ऐसे नेता लगते बदसूरत १८
सरकार की हमें नहीं जरूरत,
इसके बिना हम अच्छे रहेंगे, नेताओं से बचे रहेंगे।

नेता काजू की रोटी खाते, १८ 
हमको रूखा टुकड़ा चलता। १८
वस्त्र हमारे हफ्ते में धुलते, १८
नेता पल पल पोषाक बदलता।  १८    
भारत के नेता ऐसे धूरत १९
सरकार की हमें नहीं जरूरत,
इसके बिना हम अच्छे रहेंगे, नेताओं से बचे रहेंगे।

सरकार हमको बहुत रुलाती १६
टैक्स लगा महंगाई बढ़ाती, १७
नेता सब कुछ मुफ्त पाते हैं १७
हमको टुकड़ों को भी तरसाती। १८
नेता जैसी सरकारी मूरत १८
सरकार की हमें नहीं जरूरत,
इसके बिना हम अच्छे रहेंगे, नेताओं से बचे रहेंगे। 

बिन सरकार हम शहर छोड़ेंगे
शुद्ध जलवायु के गाँव रहेंगे।
जरूरतें अपनी कम रखेंगे,
उनका खुद उत्पादन करेंगे।
बापू के ग्राम स्वराज की मूरत
सरकार की हमें नहीं जरूरत,
इसके बिना हम अच्छे रहेंगे, नेताओं से बचे रहेंगे।

बिजली सूरज से निःशुल्क लेंगे, 
पानी प्रकाश बिजली से लेंगे। १८  
यात्रा हम साइकिल से करेंगे, 
शारीरिक श्रम से स्वस्थ रहेंगे।
सब बच्चे होंगे गाँव सम्पूरक,
सरकार की हमें नहीं जरूरत,
इसके बिना हम अच्छे रहेंगे, नेताओं से बचे रहेंगे।  

गाँव में हम खेती बाड़ी करेंगे, १८  
खेतों में सब्जी अन्न उगेंगे।  १८  
अपने बगीचों से फल खाएंगे, १९
भोजन के हम विकल्प पाएंगे।   
स्वस्थ बनें प्रेरणा के पूरक।  २० 
सरकार की हमें नहीं जरूरत,
इसके बिना हम अच्छे रहेंगे, नेताओं से बचे रहेंगे।

घर घर बकरी मुर्गी पालेंगे, 
कुत्ते बिल्ली चूहे न तारेंगे। १८ 
बन्दर सूअर रोगों के मूल १८   
इनका पालन मानव की भूल १४
स्वस्थ रहेंगे परस्पर प्रतिपूरक,
सरकार की हमें नहीं जरूरत,
इसके बिना हम अच्छे रहेंगे, नेताओं से बचे रहेंगे।

ग्राम्य उत्पाद के उद्यम होंगे। २० 
गाँव गाँव खुद सक्षम होंगे। 
उद्योगों से रोज़गार मिलेगा, १८  
घर रहकर सबको काम मिलेगा। १८
गाँव की आज़ादी व्यक्ति परिपूरक 
सरकार की हमें नहीं जरूरत,
इसके बिना हम अच्छे रहेंगे, नेताओं से बचे रहेंगे।

Thursday, October 24, 2019

अनायास ही उंगली छू गई



अनायास ही उंगली छू गई 

हुई थीं सुबह में जो आँखें चार 
आँखों में भरा था प्यार बेशुमार,
संवाद भी कोई नहीं हुआ था 
किन्तु मैं उसका घर जानता था। 
अब जब ज़िन्दगी की दुपहरी गयी 
यों अनायास ही उंगली छू गई। 

ज़िन्दगी नीरस सिसक रही है 
पीड़ा मन में कसक रही है 
मुलाक़ात होती जो एक बार 
देखता रूबरू क्या है प्यार।
जब साहस किया तो रूह गई 
यों अनायास ही उंगली छू गई।   
  
यूँ कोई खास मक़सद नहीं था 
उठे कदम पहुंचा मैं वहीँ था। 
बीती सदी आधी, देखा मुझको 
याद आयी लक्ष्मण रेखा उसको।
वह भी मेरी तरह ही सहमी हुई, 
यों अनायास ही उंगली छू गई।   

उसके घर में मैं चुप बैठा रहा,
सोच रहा था मैं क्यों आया यहां। 
तभी दो हाथ मेरा स्वागत किये 
मुझसे जलपान का आग्रह लिये।
मेरे उठे हाथ नज़र झुकी रही 
यों अनायास ही उंगली छू गई।

यों तो कुछ विशेष नहीं घटा,
किन्तु मन में एक बवंडर उठा 
वह सहमी सी वहां से चली गई, 
चला आया मैं, आत्मा मर गई। 
जी तो रहा हूँ ज़िन्दगी चू गई 
यों अनायास ही उंगली छू गई। 

Tuesday, October 22, 2019

आओ चलो फिर लौट चलें




आओ चलो फिर लौट चलें, बीते दिन हमें बुलाते हैं.
उन प्रसंगों को युग बीता, फिर भी आज रुलाते हैं। 

पहली बार तुम्हें देखा जब, तब तुम एक किशोरी थीं  
एक दिन तुम होगी मेरी, प्रफुल्लित पोरी पोरी थी। 
गालों पर इठलाता लावण्य आँखें लज्जा से बोझिल 
तुम एक पुस्तक पढ़ रही थीं बेसुध सी थी कोकिल। 
शब्द मचलते ओठों पर, रिमझिम में पत्ते इतराते हैं 
आओ चलो फिर लौट चलें, बीते दिन हमें बुलाते हैं। 

एक दिन तुम मेरे घर आईं, मुझे देख शरमाई थीं 
मैं छुप बैठा था दूर कहीं, चाहत की चोरी छुपाई थी.
मन में था विश्वास अटल, पर तन मेरा घबराता था 
नयन बंध जाते डोरी से बस चोरी से मुस्काता था।
उन लम्हों के गीतों को  तन मन अब भी गाते हैं    . 
आओ चलो फिर लौट चलें, बीते दिन हमें बुलाते हैं।

तुम कॉलेज से घर आ रहीं थीं मैंने तुमको देखा था 
हर डाली पर फूल खिले थे मौसम भी रंगीला था। 
साहस जुटा कर कैसी हैं आप, मैंने तुमसे पूछा था,
अच्छी हूँ आप कैसे हैं, कुछ आकर्षण मुस्काया था.
प्रथम संवाद ऐसा मोहक जैसे सागर लहराते हैं।     
आओ चलो फिर लौट चलें, बीते दिन हमें बुलाते हैं।

समय आने पर हम दोनों जब शादी के अनुकूल हुए 
लेकिन पिताश्री के आदेश मेरे मन के प्रतिकूल हुए.
बहुत रोया था तन मन पर साहस नहीं जुटा पाया
तुम बध गयीं एक डोर से, खुद को मैंने लुटा पाया। 
आज भी अनुशासन के बंधन कांटे से चुभ जाते हैं.
आओ चलो फिर लौट चलें, बीते दिन हमें बुलाते हैं। 

कुछ दिन बाद पिताश्री ने मुझको बांधा बंधन में 
बिसराये वो गीत अधूरे, बन ना पाया चन्दन मैं।  
अपने अपने परिवारों में हम दोनों यौं व्यस्त हुए
संबंधों के चंगुल में, पावन मन के अंकुर पस्त हुए।
सूखा सारा जीवन है, पर वो लम्हे बहुत सताते हैं 
आओ चलो फिर लौट चलें, बीते दिन हमें बुलाते हैं।  
           

अदृश्य प्रेमिका



अदृश्य प्रेमिका 

मुझको लगता है हरदम, उसने मेरा नाम लिया है।

उसकी खुशबू मेरी हवा में है
उसकी सूरत मेरी दुआ में है
उसको कभी नहीं देखा न उसको कोई नाम दिया है
मुझको लगता है हरदम, उसने मेरा नाम लिया है।

वो चलती मेरे साथ में है
रास्ते की बरसात में है
बरसाती चादर ओढ़े चलते चलते आराम किया है  
मुझको लगता है हरदम, उसने मेरा नाम लिया है।

काली रात के अंधियारे में
कहा कान के गलियारे में
आओ चलो दूर चलें संसार का सागर पार किया है
मुझको लगता है हरदम, उसने मेरा नाम लिया है।

उसको भी कोई दुःख होगा,
दुखियारे के पास सुख होगा
दुःख के पथ पर चलते जाएँ ऐसा सपना देख लिया है
मुझको लगता है हरदम, उसने मेरा नाम लिया है।

दुखिया ने दुखिया को चुना 
दुःख दुःख का ताना बाना बुना
दुःख का कहीं क्षितिज होगा यह हमने मान लिया है
मुझको लगता है हरदम, उसने मेरा नाम लिया है।

उसका हाथ मेरे हाथ में है
हरदम रहती मेरे साथ में है
पर दिखाई नहीं देती अपना रूप ऐसा बाँध लिया है
मुझको लगता है हरदम, उसने मेरा नाम लिया है। 

चल निकला हूँ बिना डर के
उसके ऊपर विश्वास करके
अब कहीं भी ले जाए उसको साथी मान लिया है
मुझको लगता है हरदम, उसने मेरा नाम लिया है।

कौन है वो मैं नहीं जानता
सदा संग रहेगी यही मानता
दोनों के दुःख मिट जाएंगे ऐसा हमने जान लिया है
मुझको लगता है हरदम, उसने मेरा नाम लिया है। 

जो कुछ दिखाई नहीं देता
हमसे कुछ भी नहीं लेता
जो दिखलाई दे रहा उसका छल तो जान लिया है
मुझको लगता है हरदम, उसने मेरा नाम लिया है।

उसके पास बैठकर पूछा 
मेरा ही क्यों नाम सूझा
भीड़ भरे संसार में तुम को ही अकेला पा लिया है
मुझको लगता है हरदम, उसने मेरा नाम लिया है। 

Tuesday, October 15, 2019

आज मन उदास है।



काम में मन लगता नहीं, 
आज मन उदास है। 

उसकी परछाईं साथ रहती है 
कभी कभी आँखों से बहती है 
कभी दिखाई नहीं देती 
पर लगता आसपास है 
आज मन उदास है। 

परेशां हूँ खुद से 
ख्वाहिशों की ज़िद से 
यों लगता सब सकून है 
उबल रहा मेरा खून है
चला जाऊं खुद से दूर बहुत  
जहाँ उसके न होने की आस है 
आज मन उदास है। 

कभी जागा सा नहीं रहता 
सोता ही नहीं कैसे जगता 
आसान है कर्म से भागूं 
पर कैसे अपने मन से भागूं 
यहां मानव हताश है 
आज मन उदास है। 

एक दिन ऐसा भी था 
बिन मिले भी मिलना जैसा था 
मन बंधे थे एक डोर से 
भावी आशा के जोर से 
अब आशा ही निराश है 
आज मन उदास है। 

एक दिन अचानक मिल गया 
उसने जो पूछा हिल गया 
हम तुम क्यों दूर हुए 
इतने क्यों मजबूर हुए 
अब भी उत्तर का प्रयास है 
आज मन उदास है।   
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